नारायण सिह विरूद्ध म0प्र0राज्य 1985 ए0आई0आर0 1678 के मामले मे माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया है कि धटना की भयावता को देखकर व्यक्ति अपना संतुलन खो देता है और गंूगा हो जाता है इसलिये धटना के कुछ समय तक धटना का विवरण न देना या हमलावर का नाम न वताना अस्वभाविक आचरण की श्रैणी मे नही आता है ।
सत्यनारायण रेडडी और अन्य विरूद्ध हैदरावाद राज्य 1956 ए0 आई0आर0 379 के मामले मे माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया है कि जहाॅ धटना के चक्षुदर्शी साक्षी ने धटना के धटित होने के कुछ दिन वाद धटना के सवंध मे कथन किया हो,वहाॅ ऐसी साक्षी की परिसाक्ष्य पर सतर्कता से विचार करना चाहिये और यदि साक्षी का कथन सत्य पाया जाता है तो ऐसे साक्षी के कथन पर विश्वास कर दोषसिद्धि अभिलिखित की जा सकती है ।
सत्यनारायण रेडडी और अन्य विरूद्ध हैदरावाद राज्य 1956 ए0 आई0आर0 379 के मामले मे माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह प्रतिपादित किया है कि जहाॅ धटना के चक्षुदर्शी साक्षी ने धटना के धटित होने के कुछ दिन वाद धटना के सवंध मे कथन किया हो,वहाॅ ऐसी साक्षी की परिसाक्ष्य पर सतर्कता से विचार करना चाहिये और यदि साक्षी का कथन सत्य पाया जाता है तो ऐसे साक्षी के कथन पर विश्वास कर दोषसिद्धि अभिलिखित की जा सकती है ।
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